आर्सेनिक के जहर का कहर/ आर्सेनिक जल प्रदूषण
आर्सेनिक के जहर का कहर
आर्सेनिक युक्त पानी से हो रहा है कैंसर
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रूड़की के निदेशक डॉ. आर. डी. सिंह ने ‘यूनीवार्ता’ को बताया कि पश्चिम बंगाल के कई गांवों में पीने के पानी में प्रति लीटर 3.20 मि.ग्रा. आर्सेनिक पाया गया है, जो सरकार द्वारा निर्धारित मानक से 64 गुणा अधिक है। उन्होंने बताया कि आर्सेनिक एक ऐसा विषैला तत्व है, जिसका अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो यह कैंसर उत्पन्न कर देता है।
तालाब पहुंचा रहे हैं भूजल तक ज़हर
आर्सेनिक का प्रदूषण तालाबों से भूजल तक पहुंच रहा है.एक नए शोध का कहना है कि बांग्लादेश के तालाब लाखों लोगों तक आर्सेनिक का ज़हर पहुंचाने के ज़िम्मेदार हैं.शोध का कहना है कि तालाबों में मौजूद आर्सेनिक ज़हर भूमिगत जल को भी प्रदूषित कर रहा है.मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्युट ऑफ टेक्नोलोजी के शोधकर्ताओं का कहना है कि बांग्लादेश के तालाबों में ऐसा कचरा फेंका जा रहा है जिसमें जैविक कार्बन की बहुतायत है और उससे भूमिगत जल भी प्रदूषित हो रहा है.
भारत के कुछ राज्यों के भूजल में उच्च आर्सेनिक की मौजूदगी
अटैचमेंट में देखें कि किस राज्य के किस ब्लॉक में यह प्रदूषण कहां तक फैला है।
उत्तर प्रदेश, असम और छत्तीसगढ़ राज्यों के मामले में आर्सेनिक प्रदूषण की पहचान केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड और राज्य भूमि जल विभागों के निष्कर्ष के आधार पर की गई है ।
स्रोत: केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड और आर्सेनिक कार्य दल (मार्च 2008)
हम पी रहे है मीठा जहर
गंगा के मैदानी इलाकों में बसा गंगाजल को अमृत मानने बाला समाज जल में व्याप्त इन हानिकारक तत्वों को लेकर बेहद हताश और चिंतित है। गंगा बेसिन के भूगर्भ में 60 से 200 मीटर तक आर्सेनिक की मात्रा थोडी कम है और 220 मीटर के बाद आर्सेनिक की मात्रा सबसे कम पायी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार गंगा के किनारे बसे पटना के हल्दीछपरा गांव में आर्सेनिक की मात्रा 1.8 एमजी/एल है। वैशाली के बिदुपूर में विशेषज्ञों ने पानी की जांच की तो नदी से पांच किमी के दायरे के गांवों में पेयजल में आर्सेनिक की मात्रा देखकर वे दंग रह गये। हैंडपंप से प्राप्त जल में आर्सेनिक की मात्रा 7.5 एमजी/एल थी ।
छपरा सारण के लोग आर्सेनिक युक्त जहरीला पानी पीने को अभिशप्त
किरादल्ली टाण्डा (बीजापुर) क्षेत्र के पानी में आर्सेनिक
लखनऊ में आर्सेनिक
बिहार की जमनिया नदी की सतह पर भी आर्सेनिक
पानी पीकर मरते हैं लोग
यूपी के महाराजगंज के भूजल में आर्सेनिक की स्थिति
जल पर्यावरण का जीवनदायी तत्व है. परिस्थितिकी के निर्माण में जल आधारभूत कारक है. वनस्पतियों से लेकर जीव-जंतु अपने पोषक तत्वों की प्राप्ति जल से करते हैं. मनुष्य के भौतिकवादी दृष्टिकोण, विज्ञान और तकनीक की निरंतर प्रगति, बढता औद्योगीकरण और शहरीकरण, खेतों में पैदावार बढाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग, कीटनाशकों का अनियंत्रित प्रयोग व जनसंख्या में हो रही वृद्धि तथा जनमानस की प्रदूषण के प्रति उदासीनता के कारण जल प्रदूषण की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है.

