आर्सेनिक के जहर का कहर/ आर्सेनिक जल प्रदूषण

आर्सेनिक के जहर का कहरआर्सेनिक के जहर का कहर

आर्सेनिक युक्त पानी से हो रहा है कैंसर

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josh18.in.com
सहारनपुर। देश के कई भागों में आर्सेनिक युक्त जल पीने के कारण लोग कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश तथा बिहार के अनेक गांवों में भूजल में आर्सेनिक तत्व पाए जाने की पुष्टि वैज्ञानिकों ने की है।

राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रूड़की के निदेशक डॉ. आर. डी. सिंह ने ‘यूनीवार्ता’ को बताया कि पश्चिम बंगाल के कई गांवों में पीने के पानी में प्रति लीटर 3.20 मि.ग्रा. आर्सेनिक पाया गया है, जो सरकार द्वारा निर्धारित मानक से 64 गुणा अधिक है। उन्होंने बताया कि आर्सेनिक एक ऐसा विषैला तत्व है, जिसका अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो यह कैंसर उत्पन्न कर देता है।
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तालाब पहुंचा रहे हैं भूजल तक ज़हर

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बीबीसी
आर्सेनिक का प्रदूषण तालाबों से भूजल तक पहुंच रहा है.आर्सेनिक का प्रदूषण तालाबों से भूजल तक पहुंच रहा है.एक नए शोध का कहना है कि बांग्लादेश के तालाब लाखों लोगों तक आर्सेनिक का ज़हर पहुंचाने के ज़िम्मेदार हैं.शोध का कहना है कि तालाबों में मौजूद आर्सेनिक ज़हर भूमिगत जल को भी प्रदूषित कर रहा है.

मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्युट ऑफ टेक्नोलोजी के शोधकर्ताओं का कहना है कि बांग्लादेश के तालाबों में ऐसा कचरा फेंका जा रहा है जिसमें जैविक कार्बन की बहुतायत है और उससे भूमिगत जल भी प्रदूषित हो रहा है.

भारत के कुछ राज्यों के भूजल में उच्च आर्सेनिक की मौजूदगी

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wrm.nic.in
असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में आर्सेनिक प्रदूषण काफी बड़े स्तर तक प्रभावित कर रहा है।
अटैचमेंट में देखें कि किस राज्य के किस ब्लॉक में यह प्रदूषण कहां तक फैला है।

उत्तर प्रदेश, असम और छत्तीसगढ़ राज्यों के मामले में आर्सेनिक प्रदूषण की पहचान केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड और राज्य भूमि जल विभागों के निष्कर्ष के आधार पर की गई है ।

स्रोत: केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड और आर्सेनिक कार्य दल (मार्च 2008)

हम पी रहे है मीठा जहर

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राजीव कुमार, चरखा फीचर्स

गंगा के मैदानी इलाकों में बसा गंगाजल को अमृत मानने बाला समाज जल में व्याप्त इन हानिकारक तत्वों को लेकर बेहद हताश और चिंतित है। गंगा बेसिन के भूगर्भ में 60 से 200 मीटर तक आर्सेनिक की मात्रा थोडी कम है और 220 मीटर के बाद आर्सेनिक की मात्रा सबसे कम पायी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार गंगा के किनारे बसे पटना के हल्दीछपरा गांव में आर्सेनिक की मात्रा 1.8 एमजी/एल है। वैशाली के बिदुपूर में विशेषज्ञों ने पानी की जांच की तो नदी से पांच किमी के दायरे के गांवों में पेयजल में आर्सेनिक की मात्रा देखकर वे दंग रह गये। हैंडपंप से प्राप्त जल में आर्सेनिक की मात्रा 7.5 एमजी/एल थी ।

छपरा सारण के लोग आर्सेनिक युक्त जहरीला पानी पीने को अभिशप्त

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जागरण याहू / Jul 20,09
विकास का क्षितिज छू लेने के होड़ में जल संचय व संरक्षण की प्राचीन व्यवस्था सारण के इस गंगा तटीय क्षेत्र में लगभग समाप्त सी हो गयी। पोखर सूख गये और चंवरों से नदी तक जाने वाले पईन व नाले नक्शे से गायब हो गये। नालों पर मकान खड़ा कर दिया गया और पोखर खेत बन गये। लोगों को जल संरक्षण का भान नहीं रहा और भूमिगत जल में गिरावट होती चली गयी। आज जब पीने के पानी की समस्या खड़ी हुई है तो यहां के लोगों को पोखर व जल संरक्षण का महत्व समझ में आने लगा है। छपरा सारण के गंगा तटीय निवासी बिन पानी की मछली की तरह तड़प रहे हैं। परम्परागत जल स्त्रोत की उपेक्षा व भूमिगत जल के दोहन का कुप्रभाव यहां दिखने
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किरादल्ली टाण्डा (बीजापुर) क्षेत्र के पानी में आर्सेनिक

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- टी वी सिवानन्दन / The Hindu (New Delhi)
कर्नाटक के गुलबर्गा जिले स्थित सुरपुर तालुका के किराडल्ली टाण्डा गाँव में पेयजल के स्रोतों के पानी के चार नमूनों में से तीन नमूनों में आर्सेनिक की मात्रा मानक स्तर से काफ़ी ज्यादा पाई गई है। यह मानक भारतीय पेयजल मानकों के तय बिन्दुओं IS 10500 के अनुसार जाँचे गये। भूगर्भ और खान विभाग की मुख्य केमिस्ट शशि रेखा द्वारा अधिकारी द्वारा जिला परिवार कल्याण अधिकारी नलिनी नामोशी को सौंपी गई रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि टांडा के इन पेयजल नमूनों में आर्सेनिक की मात्रा 0.01 mg/l पाई गई है जो कि तय मानक से अधिक है।

लखनऊ में आर्सेनिक

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10 जून 2007/ हिन्दुस्तान दैनिक
जमीन के नीचे का पानी भी अब सुरक्षित नहीं रहा। लखनऊ के भूजल में आर्सेनिक जैसे घातक रसायन मिलने की पुष्टि हुई है। जल संस्थान के 14 ट्यूबलों से लिए गए पानी के नमूनों में से सात में आर्सेनिक पाया गया है। मानकनगर व आशियाना समेत शहर के कई इलाकों के भू-जल में यह जहर मिला है। हालाँकि निरालानगर सबसे अधिक प्रभावित है। विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए पानी के 24 नमूनों में 0.020-0.030 मिलीग्राम प्रति लीटर आर्सेनिक पाया गया। यह मात्रा सामान्य से लगभग तीन गुना ज्यादा है।

बिहार की जमनिया नदी की सतह पर भी आर्सेनिक

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कौशल शुक्ला, मुजफ्फरपुर, बिहार / allvoices.com
गंगा किनारे बसे राज्य के बारह जिलों भागलपुर, कटिहार, खगडिय़ा, मुंगेर, लखीसराय, बेगूसराय, समस्तीपुर, पटना, भोजपुर, बक्सर, वैशाली और सारण के लगभग 80 प्रखंडों में आर्सेनिक का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, वैज्ञानिक अभी यह बता पाने में अक्षम हैं कि जल में जहर के रूप में आर्सेनिक कहां से और कैसे फैलता जा रहा है, पर यह भी सच है कि इस खतरे से बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल तथा नेपाल के भीतर का बड़ा हिस्सा भी प्रभावित है। तिलका मांझी विश्वविद्यालय भागलपुर के वनस्पति विभाग की टीम ने डा. सुनील कुमार चौधरी और पटना स्थित अनुग्रह नारायण कालेज के पर्यावरण और जल प्रबंधन विभाग के डा.
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पानी पीकर मरते हैं लोग

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in.jagran.yahoo.com
वाराणसी [जयप्रकाश पांडेय]। आर्सेनिक, आयरन और फ्लोराइड मिश्रित पानी पीने के लिए पूर्वाचल के कई जिले मजबूर हैं। दरअसल बलिया, मऊ, गाजीपुर व सोनभद्र के 11 ब्लाकों में स्थित 140 गांवों की लगभग दो लाख 30 हजार की आबादी को पीने के लिए शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं कराया जा सका है। यहां भूजल में कहीं आर्सेनिक, कहीं आयरन तो कहीं फ्लोराइड घुल चुके हैं।

यूपी के महाराजगंज के भूजल में आर्सेनिक की स्थिति


जल पर्यावरण का जीवनदायी तत्व है. परिस्थितिकी के निर्माण में जल आधारभूत कारक है. वनस्पतियों से लेकर जीव-जंतु अपने पोषक तत्वों की प्राप्ति जल से करते हैं. मनुष्य के भौतिकवादी दृष्टिकोण, विज्ञान और तकनीक की निरंतर प्रगति, बढता औद्योगीकरण और शहरीकरण, खेतों में पैदावार बढाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग, कीटनाशकों का अनियंत्रित प्रयोग व जनसंख्या में हो रही वृद्धि तथा जनमानस की प्रदूषण के प्रति उदासीनता के कारण जल प्रदूषण की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है.