जल संगठन गतिविधियां
पीढ़ी जल संवाद का अनोखा आयोजन
अपने पानी की चिंताधार। मप्र के आदिवासी बहुल जिले धार में 8 मार्च महिला दिवस पर आयोजित विशेष ग्रामसभा में पीढ़ी जल संवाद नामक कार्यक्रम हुआ। इसमें आदिवासी महिलाओं ने शुद्ध पानी के लिए गांव की पुरानी बावड़ियों को जीवित करने के लिए जनभागीदारी की पहल की। वहीं गांव के बुजुर्गों ने अपने अनुभव के माध्यम से युवा पीढ़ी को बताया कि किस तरह से बिना हैंडपंप के ही बीते जमाने में पानी आसानी से उपलब्ध हो जाता था। युवाओं को यह अहसास हुआ है कि अब समय आ गया है कि पानी के लिए बुजुर्गों के अनुभव की ओर लौटा जाए। नर्मदा पर निर्माणाधीन महेश्वर बांध पर परियोजनाकार को कारण बताओ नोटिस जारी
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NBA, MOEFउपयुक्त पुनर्वास न होने के कारण जब महेश्वर बांध परियोजना के सैकड़ो प्रभावितों ने नई दिल्ली में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के समक्ष अचानक धरना दिया तो केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश ने महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए पर्यावरण मंत्रालय के अधिनियम 5 के तहत परियोजनाकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। बांध से प्रभावित गांववासी सालों से यह कहते रहे हैं कि उनका पुनर्वास उस गति से नहीं हो पा रहा है जिस गति से बांध का निर्माण हो रहा है। जबकि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा परियोजना को दी गई सशर्त मंजूरी में यह कहा गया है कि बांध का निर्माण और पुनर्वास साथ-साथ होने चाहिए।
मेघ पाईन अभियान की कुछ झलकियां
बिहार के कोशी क्षेत्र के प्राय: हैण्डपम्पों के पानी में आयरन की अधिकता होती है। इससे लोगों को कई बीमारियाँ झेलनी पड़ती है। कभी परम्परागत ज्ञान के बदौलत कई ढंग से आयरन शुद्ध करने के प्रयास किये जाते थे।
मेघ पाईन अभियान ने जब बिहार के सुपौल जिला के सुपौल प्रखंड के 5 पंचायतों में जल मुद्दे पर कार्य आरंभ किया तब जल संबंधी एक बड़ी समस्या आयरनयुक्त पानी ही था। 2005 से अभियान ने यहाँ पर स्थानीय संगठन ग्राम्यशील की अगुवाई में इस दिशा में समस्या के निदान हेतु सोचना आरंभ किया। और परिणामस्वरूप स्थानीय संसाधन, हुनर आधारित मटका फिल्टर नामक आयरन शुद्धिकरण उपकरण विकसित किया गया। लेकिन जमीनी स्तर पर प्रचार व व्यवहार आसान नहीं है।
मेघ पाईन अभियान ने जब बिहार के सुपौल जिला के सुपौल प्रखंड के 5 पंचायतों में जल मुद्दे पर कार्य आरंभ किया तब जल संबंधी एक बड़ी समस्या आयरनयुक्त पानी ही था। 2005 से अभियान ने यहाँ पर स्थानीय संगठन ग्राम्यशील की अगुवाई में इस दिशा में समस्या के निदान हेतु सोचना आरंभ किया। और परिणामस्वरूप स्थानीय संसाधन, हुनर आधारित मटका फिल्टर नामक आयरन शुद्धिकरण उपकरण विकसित किया गया। लेकिन जमीनी स्तर पर प्रचार व व्यवहार आसान नहीं है।
चाल-खाल से बचाओ जंगल
एक सुंदर चाल
जलवायु परिवर्तन के दौर में यह स्थिति कभी बढ़ेगी तो कभी घट भी सकती है। अब अनियमित वर्षा को जल संरचनाए ही समेट पायेंगी। यह ध्यान देने योग्य है कि पहाड़ी राज्यों को ढालदार पहाड़ियों पर जल संरचनायें बनाकर धरती में जलधारण क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है। धरती के ऊपर पुराने समय में लोगों ने स्वयं के उपयोग एवं पशुओं के पेयजल के लिए चाल-खाल बनाये थे। इसमें से अब अधिकांश संरचनायें सीमेंटेड हो गयी है। फलस्वरूप इनका पानी सूख गया है। अब ऊपरी ढालदार पहाड़ियों पर उगने वाली चौड़ी पत्तियों के जंगल भी कम हो गये हैं।पहियों पर जल साक्षरता
नेहरू इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, नोएडा
13 जनवरी 2010 जल साक्षरता अभियान के लिए एक शुभ दिन रहा क्योंकि इस दिन जल साक्षरता के लिए मोबाइल वैन शुरु की गई। उद्घाटन कार्यक्रम नेहरू इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, सेक्टर-11, नोएडा में विद्यालय की प्रधानाचार्या एलिना दयाल के सहयोग से जनहित फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. पी.के. मेहरोत्रा, निदेशक, जल संसाधन, भारत सरकार ने लैम्प जलाकर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर डॉ. एस.बी. सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, केन्द्रीय भूजल बोर्ड, श्री एस के यादव , प्राध्यापक, डिपार्टमेट ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग एंड एक्सटेंशन, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), श्री प्रभजोत सिंह, सीनियर फील्ड मार्केटिंग मैनेजर, एडोब, अंविता सिंह कैफ और अनीता राणा, निदेशक, जनहित फाउंडेशन भी मौजूद थीं।
13 जनवरी 2010 जल साक्षरता अभियान के लिए एक शुभ दिन रहा क्योंकि इस दिन जल साक्षरता के लिए मोबाइल वैन शुरु की गई। उद्घाटन कार्यक्रम नेहरू इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, सेक्टर-11, नोएडा में विद्यालय की प्रधानाचार्या एलिना दयाल के सहयोग से जनहित फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. पी.के. मेहरोत्रा, निदेशक, जल संसाधन, भारत सरकार ने लैम्प जलाकर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर डॉ. एस.बी. सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, केन्द्रीय भूजल बोर्ड, श्री एस के यादव , प्राध्यापक, डिपार्टमेट ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग एंड एक्सटेंशन, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), श्री प्रभजोत सिंह, सीनियर फील्ड मार्केटिंग मैनेजर, एडोब, अंविता सिंह कैफ और अनीता राणा, निदेशक, जनहित फाउंडेशन भी मौजूद थीं।
केरल में जल-सम्मेलन का आयोजन
त्रिशूर, केरल के जल सम्मेलन में बोलते हुए राजेन्द्र सिंह7 दिसम्बर 09 को केरल के त्रिशूर जिले में यूनिसेफ और जिला प्रशासन की साझेदारी में 'सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य के एक पहलू' जल और स्वच्छता को लेकर परिचर्चा का आयोजन किया गया था जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में पधारे थे मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित राजेंद्र सिंह. राजेन्द्र सिंह ने पानी पर बोलते हुए कहा कि पानी को समझना और पानी को प्यार से जीना जीवन के लिए जरूरी है.इस खबर के स्रोत का लिंक:
बुंदेलखंड में बहुरेगी तालाबों की किस्मत
वेब/संगठन:
navbharattimes indiatimes comSource:
15 Jan 2010इस खबर के स्रोत का लिंक:
ऐतिहासिक कुएं की तस्वीर बदलने का बीड़ा उठाया
सिवानी मंडी. इलाके में ऐतिहासिक कुएं को पुर्नजीवित करने के उद्देश्य से समाजसेवियों ने कदम आगे बढ़ाए हैं। स्वामी दयानंद मार्ग स्थित यह कुआं आजादी से पहले का है और अब पिछले करीब 14 वर्षों से बंद पड़ा है। यह कुआं एक समय में सिवानी समेत दूर-दराज के इलाके के लोगों की प्यास बुझाता था।कुएं की जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। कुछ समाजसेवी युवाओं ने कुआं बचाओ कमेटी का गठन करके न केवल कुएं की जमीन को बिना किसी प्रशासनिक सहायता के कब्जामुक्त करवाया बल्कि इसका जीर्णाद्वार करने का बीड़ा भी उठाया है।
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हो सकती है सरस्वती पुनर्प्रवाहित
वेब/संगठन:
bhartiyapaksha.comSource:
कृष्ण कुमार भारतीय
सरस्वती नदी पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय अधिवेशनभारतीय संस्कृति शोध पर आधारित है। भारतीय संस्कार, रीति-रिवाज तथा परंपराएं वैज्ञानिक कसौटी पर खरी उतरती हैं, ये शब्द भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक डा. के. एन. श्रीवास्तव ने सरस्वती नदी शोध संस्थान द्वारा कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा।पोर्टल से स्टूडेंट्स सीखेंगे वॉटर मैनेजमेंट
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भूपेंद्र/navbharattimes

