साक्षात्कार : जल योद्धाओं से रू-ब-रू
हर कॉलोनी में एक तलैया हो : केजी व्यास
मध्यप्रदेश में पानी रोको अभियान की आयोजना बनाने वाली टीम के एक सदस्य श्री केजी व्यास से भी हमने जल संरचनाओं के तकनीकी पक्ष को लेकर विस्तृत बातचीत की। श्री व्यास मूलतः भूवैज्ञानिक हैं और पानी आंदोलन के वरिष्ठ चिंतक रहे हैं। आप म.प्र. सरकार की राज्य स्तरीय जलग्रहण कार्यक्रम समिति में सदस्य भी हैं। श्री व्यास ने उन देशों की भी यात्रायें की है जहां पानी हमारे देश के मुकाबले बहुत कम बरसता है। लेकिन बेहतर जल प्रबंधन के कारण वहां के निवासियों के चेहरे पानीदार लगते हैं। इस बातचीत के कुछ अंश के माध्यम से आप भी श्री व्यास से रूबरू होईएः
अभी और जंग लड़नी है : राधा भट्ट
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राधा भट्ट: फोटो साभार - चौथी दुनियाहिमालय को बचाना है. नदियों, पर्वतों और जंगलों को पैसों के लालची व्यापारियों की भेंट नहीं चढ़ने देना है. चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े. गांधी शांति प्रतिष्ठान की अध्यक्ष राधा भट्ट के दिन रात आजकल इसी जद्दोज़हद में कट रहे हैं. वे लड़ रही हैं. उत्तराखंड की महिलाओं के साथ आंदोलन कर रही हैं. पर्वतों, नदियों, जंगलों और घाटियों की पद यात्रा करते हुए सरकार के ख़िला़फ, व्यापारियों और बिल्डरों के ख़िला़फ विरोध के स्वर पूरी मज़बूती से दर्ज़ करा रही हैं.इस खबर के स्रोत का लिंक:
हर व्यक्ति की अपनी नर्मदा होती है- मेधा पाटकर
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निर्मला डोसी
मेधा ताईसन् सत्तावन के आंदोलन के सक्रिय भागीदार बसंत खानोलकर तथा 'स्वाधार' व अन्य समाजसेवी संस्थाओं से शिद्दत से जुड़ी इंदु ताई की बेटी मेधा साधारण स्त्री होती तो आश्चर्य होता। जिन्होंने नि:स्वार्थ समाजसेवा, देश के लिये पूर्ण समर्पण व दुर्धर्ष कर्मठता के संस्कार जन्मघुट्टी में पाये और वैसे ही स्वस्थ परिवेश में बड़ी हुईं। उनके व्यक्तित्व में जो धार है, वह यशस्वी माता-पिता से मिली। शिक्षा, संस्कार तथा परिवेश ने उसे और सान पर चढ़ाया। दिसंबर 1954 में जन्मी मेधा ने 'सामाजिक कार्य' विषय लेकर एम.ए.लौटें मिट्टी की ओर
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विलियम बटलर यीट्स
" हमने जो भी किया, कहा या गाया है वह सब हमें अपनी मिट्टी से मिला है।" डा. वंदना शिवा, सॉइल नॉट ऑयल और अर्थ डेमोक्रेसी सहित कई पुस्तकों की लेखिका और 1993 के वैकल्पिक नोबेल शांति पुरस्कार की विजेता, हमारे समय की एक प्रमुख पर्यावरणविद् और कार्यकर्ता हैं। वैश्वीकरण के खतरे के खिलाफ भोजन के अधिकार की रक्षा हेतु उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पारिस्थितिकीय के लिए रिसर्च फाउंडेशन नवदान्या की स्थापना की। 46 बीज बैंकों और उत्तर भारत में एक जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए बीज विद्यापीठ के निर्माण के साथ डॉ. शिवा लोगों को प्राकृतिक समाधान उपलब्ध करा रही हैं जो मिट्टी में रहकर सभी को जीवन देती है।
‘नदियों ने मनुष्य की चेतना और सभ्यता को इस मुकाम तक पहुँचाया’
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nainitalsamachar inप्रेम कुमार:- समुद्र तटों पर सभ्यता के विकास को आप किस दृष्टि से देखते हैं?
इरफान हबीब:- समुद्र की हमारे यहाँ इस लिहाज से खास अब कोई कीमत नहीं है। शुरू में नदियों की करीबी या दूरी से संस्कृति पर फर्क पड़ सकता था, पर अब संचार के इतने ज्यादा माध्यम हो गये हैं कि यह कहना उचित नहीं होगा। आजकल संस्कृति विचार के प्रसार-प्रचार के कारण नदी का वह पहले वाला ‘रोल’ भी नहीं रहा।
'नरेगा से पीछे हटना संभव नहीं'
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BBC Hindi
नरेगाअर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता प्रोफ़ेसर ज़्यां द्रेज़ से बातचीत
काम का अधिकार अभियान से जुड़े ज़्यां द्रेज़ से बातचीत के औचित्य के पीछे उनका रोज़गार गारंटी के लिए चले काम का अधिकार अभियान के शुरुआती सिपाहियों में शामिल होना आता है. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की विशेष सलाहकार समिति का वो हिस्सा भी रहे और फिलहाल देशभर में रोज़गार गारंटी क़ानून के क्रियान्वयन को पूरा वक़्त दे रहे हैं.
पढ़िए, कुछ अहम अंश-
राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी क़ानून के लागू होने के बाद से लेकर अब तक की इसकी स्थिति को आप किस तरह से देख रहे हैं?
पैसा दो शौचालय जाओ
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Down To Earth
बिंदेश्वर पाठकचार दशक पहले जब बिंदेश्वर पाठक ने शौचालय पद्धतियों में बदलाव लाने के लिए काम शुरू किया था, तो लोगों में कई तरह की आशंकाएं थीं. आज उनका संगठन सुलभ इंटरनेशनल एक ब्रांड बन चुका है. 2009 का स्टॉकहोम वाटर प्राइज पाने वाले पाठक से भरत लाल सेठ ने उनके संगठन की कार्यप्रणाली पर बातचीत की, प्रस्तुत है उसके अंश: सुलभ की सफलता की कहानी
कोलिन चार्टर से जलसंकट पर बातचीत
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merinews
Director General of IWMI“पानी”, जीवन की सबसे महत्वपूर्ण बात, जहाँ एक तरफ़ पानी धरती के प्राकृतिक संतुलन और सुरक्षा को बनाए रखने के लिये आवश्यक है, वहीं समूची जीव-जन्तु-मानव प्रजाति के लिये भोजन और कपड़े सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये भी जरूरी है। आज पूरे विश्व में जलवायु परिवर्तन के कारण जल स्रोतों पर नष्ट होते पर्यावरण की काली छाया गहराने लगी है। पत्रकार अशोक शर्मा ने इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (IWMI) के निदेशक कोलिन जे चार्टर्स से एक विशेष मुलाकात की और उनसे विश्व में पानी की उपलब्धता, उस पर मंडरा रहे गम्भीर खतरों तथा खाद्यान्न संकट से निपटने सम्बन्धी 
