पानी का कोई विकल्प नहीं
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ipsnews.netजल-मल निस्तारण एवं सफ़ाई पर जिम्बाब्वे में प्रसारित एक इंटरव्यू…
नोमा नेसेनी
WSSCC नामक संस्था की जल-मल निस्तारण एवं स्वास्थ्य संयोजक, नोमा नेसेनी से बुसानी बफ़ाना का लिया हुआ एक साक्षात्कार, जिसमें उन्होंने जिम्बाब्वे में जारी “सफ़ाई कार्यक्रम” एवं उसके क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं के बारे में बताया… गांधी के सपने का गांव ''हिवरे बाजार''
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आत्मदर्पण ब्लॉगएक गांव जहां पर लोग अपने उपनाम के रूप में लगाते हैं अपने गांव का नाम। एक गांव जहां पर व्यापक मंदी के इस दौर में मंदी का कोई असर नहीं हैं। एक गांव जहां से अब कोई पलायन पर नहीं जाता है। एक गांव जहां पर कोई भी व्यक्ति शराब नहीं पीता हैं । एक गांव जहां पर शिक्षक स्कूल से गायब नहीं होते हैं। एक गांव जहां पर आंगनवाड़ी रोज खुलती है। एक गांव जहां पर बच्चे कुपोषित नहीं है। एक गांव जहां पर राशन व्यवस्था गांमसभा के अनुसार संचालित होती है। एक गांव जहां पर गांव की सड़कों पर गंदगी नहीं होती है। एक गांव जिसे जल संरक्षण का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।
किसान जुटे, बढ़ा जलस्तर
भास्कर न्यूज/ धर्मेश पांडेय/ March 14, 2009
करनाल. लगातार दोहन के कारण गिर रहे भूजल स्तर से चिंतित वैज्ञानिको का प्रयास रंग लाया। भूजल स्तर उपर लाने के लिए सीसीएसआरआई करनाल के वैज्ञानिकों ने ‘रिचार्ज साफ्ट’ स्कीम तैयार कर हरियाणा व पंजाब में करीब 26 रिचार्ज नलकूप लगाए। जो चार नलकूप बरसात से पहले लगाए गए थे उनके परिणाम सकारात्मक रहे हैं। इससे वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं। यही कारण है कि मिनिस्ट्री ऑफ वाटर रिसोर्स ने ऐसे सौ प्रोजेक्ट लगाने का जिम्मा सीएसएसआरआई को सौंपा है। इसके तहत हरियाणा में 50, पंजाब में 15, यूपी में 10 व गुजरात में 25 रिचार्ज नलकूप लगाए जाएंगे।
करनाल. लगातार दोहन के कारण गिर रहे भूजल स्तर से चिंतित वैज्ञानिको का प्रयास रंग लाया। भूजल स्तर उपर लाने के लिए सीसीएसआरआई करनाल के वैज्ञानिकों ने ‘रिचार्ज साफ्ट’ स्कीम तैयार कर हरियाणा व पंजाब में करीब 26 रिचार्ज नलकूप लगाए। जो चार नलकूप बरसात से पहले लगाए गए थे उनके परिणाम सकारात्मक रहे हैं। इससे वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं। यही कारण है कि मिनिस्ट्री ऑफ वाटर रिसोर्स ने ऐसे सौ प्रोजेक्ट लगाने का जिम्मा सीएसएसआरआई को सौंपा है। इसके तहत हरियाणा में 50, पंजाब में 15, यूपी में 10 व गुजरात में 25 रिचार्ज नलकूप लगाए जाएंगे।
अकाल के काल विलासराव सालुंके की जबानी उनकी कहानी
एक कथा ऐसी भी...
"एक-दो नहीं, पसीने से लथपथ चालीस हजार लोगों को तपती दुपहरिया और झुलसाती लू को झेलते हुए एक साथ पत्थरों को तोड़ते देख मैं अवाक् रह गया। हरियाली का एक तिनका नहीं। कहीं-कहीं से छोटे बच्चों के बिलखने की आवाज और उन पर खीजतीं, चुप कराती मजदूर माताएं। चालीस हजार छोटी, हथौड़ियों की आवाज-ठक, ठड़ाक, ठक, ठक और पास की पहाड़ियों से वापस लौटती उनकी प्रतिध्वनियां। मेरा मस्तिष्क तो किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया।' 1972 में महाराष्ट्र के पुणे शहर से मात्र 36 किलोमीटर की दूरी पर सासवड़-नेजरी के बीच, मध्याह्न में, उन्हीं सूखे पहाड़ों के बीच खड़े होकर एक पत्रकार को विलासराव
ग्लोबल वार्मिंग को रोकना ही होगा
डॉ आर डी सिंहडॉ आर डी सिंह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॅजी रूड़की, हरिद्वार में स्थित है, यहां R & D के साथ- साथ विभिन्न राज्यों द्वारा सौंपे गए रिसर्च प्रोजेक्ट पर भी अध्ययन किया जाता है। जल विज्ञान भवन में स्थित इस इंस्टीट्यूट में जल वैज्ञानिक, जल के विभिन्न आयामों पर अध्ययन करने में अनथक परिश्रम करते हैं। इस इंस्टीट्यूट के निदेशक आरडी सिंह ने हिंदी वाटर पोर्टल टीम से साक्षात्कार करते हुए बताया, “ हमारे वैज्ञानिक इतने परिश्रम से रिसर्च करके नई जानकारियां खोज निकालते हैं लेकिन उनका यह ज्ञान यहां के रिसर्च प्रकाशनों में ही सिमटकर रह जाता है,
नोबेल पचौरी
आरके पचौरीमनोज तिवारी वाराणसी में भारतीय रेलवे के डीजल लोकोमोटिव वर्क्स से प्रबंधकीय कार्य की शुरुआत करने वाले भारत के एक सपूत आरके पचौरी ने नोबल शांति पुरस्कार में भारत को हिस्सेदारी दिलाई है। नैनीताल में जन्मे इस देसी सपूत ने दुनिया के बड़े से बड़े मंच पर हिंदुस्तान का परचम लहराया है। नोबल पुरस्कार में हिस्सेदारी बांटने का यह गौरव पचौरी की अध्यक्षता वाली इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) संस्था को मिला है। पारिस्थितिकी परिवर्तन और उसमें बनने वाली नीतियों में भी पचौरी का अंतरराष्ट्रीय दखल हमेशा रहा है। इस दखल ने ही देश के इस पर्यावरणविद को पारिस्थितिकी के क्षेत्र में विश्वव्यापी आयाम दिलवाया।
नैनीताल की सुरम्य वादियां श्री पचौरी को हमेशा पर्यावरण सुरक्षा के प्रति उनके दायित्व की याद दिलाती रहीं।
बूंद-बूंद को बचाने की मुहिम
जागरण याहू की खबरगाजियाबाद [फरमान अली/ जागरण याहू ]। गाजियाबाद में भारी संख्या में उद्योग होने के कारण यहां के तमाम इलाकों में भूगर्भीय जल के जहरीला होने की नौबत तक आ गई है। पर इन सबके बीच गाजियाबाद में एक शख्स ऐसा भी है, जो पानी के मूल्य को समझते हुए एक-एक बूंद जल को संरक्षित करने के लिए प्रयासरत है। खारे पानी में मीठा फल
Feb 15,2009 / जागरण याहू
नई दिल्ली, [रणविजय सिंह]। बीएसएफ के रिटायर्ड कमाडेंट बलजीत सिंह त्यागी ने बंजर भूमि पर फलदार पेड़ लगाने में तीन बार विफल रहने पर भी हिम्मत नहीं हारी। कृषि वैज्ञानिकों से पता चला कि भूमिगत पानी खारा होने से यहा पेड़ नहीं उग सकते। उन्होंने अपनी मेहनत व लगन से डेढ़ लाख लीटर क्षमता के वाटर हार्वेस्टिंग व भूमिगत जल रिचार्ज टैंक से जमीन को मीठे पानी से तर कर दिया। जिससे बाझ जमीन की कोख उर्वरा हो गई।
नई दिल्ली, [रणविजय सिंह]। बीएसएफ के रिटायर्ड कमाडेंट बलजीत सिंह त्यागी ने बंजर भूमि पर फलदार पेड़ लगाने में तीन बार विफल रहने पर भी हिम्मत नहीं हारी। कृषि वैज्ञानिकों से पता चला कि भूमिगत पानी खारा होने से यहा पेड़ नहीं उग सकते। उन्होंने अपनी मेहनत व लगन से डेढ़ लाख लीटर क्षमता के वाटर हार्वेस्टिंग व भूमिगत जल रिचार्ज टैंक से जमीन को मीठे पानी से तर कर दिया। जिससे बाझ जमीन की कोख उर्वरा हो गई।

