साइप्रस करेगा पानी का आयात

Source: 
tarachand-ola blogspot
कभी सुना है कोई देश पानी का आयात कर रहा है? जी हाँ पानी का आयात. साइप्रस आजकल पानी का आयात कर रहा है। अगर आप नहीं जानते हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दूँ की साइप्रस भूमध्य सागर में स्थित एक छोटा सा द्वीप देश है। साइप्रस पूर्वी भूमध्य सागर में तीसरा सबसे बड़ा द्वीप है। यंहा पानी का मुख्य स्रोत वर्षा और हिमपात है। सभी भूमध्य सागर तटीय देशों की तरह यहां पर बारीश सर्दियों में होती है। पिछले ३-४ सालों में साइप्रस में बारीश काफी कम हुई है और परिणाम स्वरूप यहाँ के जलस्रोत सूख गए हैं। यह ख़बर लिखे जाने के समय साइप्रस के जलाशयों में पानी की मात्रा उसकी कुल भण्डार क्षमता की ९ प्रतिशत ही रह गई है।

जलचक्र The Water Cycle

धरती पर कितना पानी उपलब्ध है?

o एक जानकारी के अनुसार धरती पर 2,94,000,000 क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध है, जिसमें से सिर्फ़ 3% पानी ही शुद्ध और पीने लायक है।
o पृथ्वी पर पानी अधिकतर तरल अवस्था में उपलब्ध होता है, क्योंकि हमारी धरती (सौर व्यवस्था) “सोलर सिस्टम” की सीध में स्थित है, अतः यहाँ तापमान न तो इतना अधिक होता है कि पानी उबलने लगे न ही तापमान इतना कम होता है कि वह बर्फ़ में बदल जाये।
o जब पानी जमता है तब वह विस्तारित होता है यानी फैलता है, जबकि ठोस बर्फ़ तरल पानी में तैरती है।

मुक्त पानी की गतिविधि

• वातावरण में भाप के रूप में
• बारिश, ओस, बर्फ़ आदि के रूप में धरती पर वापस आता है
• धरती पर बहते हुए अन्त में पुनः समुद्र में मिलता है

भारत का जल संसाधन

संपादक- मिथिलेश वामनकर/ विजय मित्रा
क्या आप सोचते हैं कि जो कुछ वर्तमान में है, ऐसा ही रहेगा या भविष्य कुछ पक्षों में अलग होने जा रहा है? कुछ निश्चितता के साथ यह कहा जा सकता है कि समाज जनांकिकीय परिवर्तन, जनसंख्या का भौगोलिक स्थानांतरण, प्रौद्योगिक उन्नति, पर्यावरणीय निम्नीकरण, और जल अभाव का साक्षी होगा। जल अभाव संभवत: इसकी बढ़ती हुई माँग, अति उपयोग तथा प्रदूषण के कारण घटती आपूर्ति के आधार पर सबसे बड़ी चुनौती है। जल एक चक्रीय संसाधन है

हवा-पानी की आजादी

हवा-पानी की आजादीहवा-पानी की आजादीआजादी की 62वीं वर्षगांठ, हर्षोल्लास के माहौल में भी मन पूरी तरह खुशी का आनन्द क्यों महसूस नहीं कर रहा है, एक खिन्नता है, लगता है जैसे कुछ अधूरा है। कहने को हम आजाद हो गए हैं, जरा खुद से पूछिए क्या आपका मन इस बात की गवाही देता है नहीं, क्यों? आजाद देश उसे कहते हैं जहां आप खुली साफ हवा में अपनी मर्जी से सांस ले सकते हैं, कुदरत के दिए हुए हर तोहफे का अपनी हद में रहकर इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन यहां तो कहानी ही उलट है। आम आदमी के लिए न पीने का पानी है न खुली साफ हवा, फिर भी हम आजाद हैं?

जल संसाधन परिचय

विश्व जलविश्व जलसामान्य तथ्य: पृथ्वी के लगभग तीन चौथाई हिस्से पर विश्र्व के महासागरों का अधिकार है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार पृथ्वी पर जल की कुल मात्रा लगミग 1400 मिलियन घन किलोमीटर है जो कि पृथ्वी पर 3000 मीटर गहरी परत बिछा देने के लिए काफी है। तथापि जल की इस विशाल मात्रा में स्वच्छ जल का अनुपात बहुत कम है। पृथ्वी पर उपलब्ध समग्र जल में से लगभग 2.7 प्रतिशत जल स्वच्छ है जिसमें से लगभग 75.2 प्रतिशत जल ध्रुवीय क्षेत्रों में जमा रहता है और 22.6 प्रतिशत भूजल के रूप में विद्यमान है। शेष जल झीलों, नदियों, वायुमण्डल, नमी, मृदा और वनस्पति में मौजूद है। जल की जो मात्रा उपभोग और अन्य प्रयोगों के लिए वस्तुतः उपलब्ध है, वह नदियों, झीलों और भूजल में उपलब्ध म

भारत में पानी

भारत में पानीपानीप्रेमचन्द्र श्रीवास्तव / पर्यावरण संदेश


सामान्य तौर पर देखने से ऐसा लगता है कि भारत में पानी की कमी नहीं है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन 140 लीटर जल उपलब्ध है। किन्तु यह तथ्य वास्तविकता से बहुत दूर है। संयुक्त राष्ट्र विकास संघ (यूएनडीओ) की मानव विकास रिपोर्ट कुछ दूसरे ही तथ्यों को उद्घाटित करती है। रिपोर्ट जहां एक ओर चौंकाने वाली है, वहीं दूसरी ओर घोर निराशा जगाती है।



इस रिपोर्ट के अनुसार भारतीय आंकड़ा भ्रामक हैं वास्तव में जल वितरण में क्षेत्रों के बीच, विभिन्न समूहों के बीच, निर्धन और धनवान के बीच, गांवों और नगरों के लोगों के बीच काफी विषमता है।

बेसिन-वार जल उपलब्धता

जल संसाधन

जल संसाधन
भारत अनेक नदियों और पहाड़ों का देश है। लग भग 329 मिलियन हैक्टेयर के इसके भौगोलिक क्षेत्र में अनेक छोटी-बड़ी नदियां प्रवाहित हो रही हैं जिसमें से कुछ नदियां विश्र्व की सर्वाधिक विशाल नदियों के रूप में गिनी जाती हैं। भारत की सांस्कृतिक उन्नति, धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन में नदियों और पहाड़ों का बहुत अधिक महत्व है।


भारत एक संघीय तंत्र सहित राज्यों का एक संघ है। राजनीतिक दृष्टि से देश 28 राज्यों और 7 संघशासित क्षेत्रों में बंटा हुआ है। भारत की जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग अर्थात 1,027,015,247 (2001 की जनगणना) आबादी ग्रामीण और कृषि-आधारित है और उसकी खुशहाली का स्रोत देश की नदियां हैं।


जल निकाय

देश के अन्तर्देशीय जल संसाधन निम्न रूप में वर्गीकृत हैं नदियां और नहरें, जलाशय, कुंड तथा तालाब; बीलें, आक्सबो झीलें, परित्यक्त जल, तथा खारा पानी। नदियों और नहरों से इतर सभी जल निकायों ने लगभग 7 मिलियन हैक्टेयर क्षेत्र घेर रखा है। जहां तक नदियों और नहरों का सवाल है, उत्तर प्रदेश का पहला स्थान है क्योंकि उसकी नदियों और नहरों की कुल लम्बाई 31.2 हजार किलोमीटर है जो कि देश के भीतर नदियों और नहरों की कुल लम्बाई का लगभग 17 प्रतिशत बैठती है। इस सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश के बाद जम्मू तथा काश्मीर और मध्य प्रदेश का स्थान आता है। अन्तर्देशीय जल संसाधनों के शेष रूपों में कुण्डों और तालाबों ने सर्वाधिक क्षेत्र (2.9 मिलियन हैक्टेयर) घेर रखा है जिनके बाद जलाशयों (2.1 मिलियन हैक्टेयर) का स्थान आता है।