जल संपदा के मामले में कुछेक संपन्नतम देशों में गिने जाने के बाद भी हमारे यहां जल संकट बढ़ता जा रहा है। आज गांवों की बात तो छोड़िए, बड़े शहर और राज्यों की राजधानियां तक इससे जूझ रही हैं। अब यह संकट केवल गर्मी के दिनों तक सीमित नहीं है। पानी की कमी अब ठंड में भी सिर उठा लेती है। दिसंबर 86 में जोधपुर शहर में रेलगाड़ी से पानी पहुंचाया गया है।
देश की भूमिगत जल संपदा प्रति वर्ष होने वाली वर्षा से दस गुना ज्यादा है। लेकिन सन् 70 से हर वर्ष करीब एक लाख 70 हजार पंप लगते जाने से कई इलाकों में जल स्तर घटता जा रहा है।
वर्षा के पानी को छोटे-बड़े तालाबों में एकत्र करने की संपन्न परंपरा अंग्रेजी राज के दिनों में खूब उपेक्षित हुई और फिर आजादी के बाद भी इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया गया। कहा जाता है देश की तीन प्रतिशत भूमि पर बने तालाब होने वाली कुल वर्षा का 25 प्रतिशत जमा कर सकते हैं।