प्रयास

हिमालय के लिए जुटे हिमालयी हिम्मत वाले लोग

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paryavaran-digest blogspot
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भारत डोगरा
अवैध कटाव की जानकारी सरकार में ऊपर तक पहुंचाई गई व साथ ही मीडिया को भी उपलब्ध करवाई गई इसी के समानांतर रक्षा-सूत्र व जन-जागृति के प्रयास जारी रहे। दिल्ली स्थिति हिमालय सेवा संघ ने भी अवैध कटाई के मामलों की ओर ध्यान दिलाने में सहायता दी। अवैध कटाई में लिप्त अनेक वन अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश भी जारी हुए। वन रक्षा आंदोलन ने नदियों की रक्षा में वनों की भूमिका पर भी जोर दिया। आंदोलन का एक प्रमुख नारा यह रहा है -उँचाई पर पेड़ रहेंगे, नदी ग्लेशियर टिके रहेंगे। हिमालय के पर्यावरण को बचाने का कार्य इस क्षेत्र के वनों व नदियों की रक्षा से जुड़ा है इसलिए इसके साथ स्थान

खास संगठन

जल संगठन गतिविधियां

जल संरक्षण के तरीके सीखे

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राजस्थान पत्रिका
पुरस्कार वितरणपुरस्कार वितरणरायसेन। कन्या महाविद्यालय में आयोजित एक सेमिनार में कॉलेज की छात्राओं ने जल संरक्षण करने के तरीके सीखे। कार्यक्रम में आए विशेषज्ञों ने छात्राओं और उपस्थित जन समूह को जल संरक्षण के साथ इसके महत्व को विस्तार से बताया। राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी संचार परिषद नई दिल्ली तथा मेगपास्ट के सहयोग से कार्यशाला का आयोजन किया गया था।
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जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय में ग्लेशियर पिघल रहे हैं, इस बात का कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं है - जयराम रमेश

वेब/संगठन: 
visfot.com
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देविंदर शर्मा
पिघलते ग्लेशियर पर रिपोर्ट जारी करते जयराम रमेशपिघलते ग्लेशियर पर रिपोर्ट जारी करते जयराम रमेशआखिर इसके निहितार्थ क्या हैं? पर्यावरण और वन मंत्री जयराम रमेश द्वारा जारी की गई रिपोर्ट हिमालयन ग्लेशियर्स के अनुसार इस बात का कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय में ग्लेशियर पिघल रहे हैं। इस अध्ययन की कोई जिम्मेदारी न लेते हुए जयराम रमेश ने बड़ी तत्परता से इसमें जोड़ा कि इसका मतलब इस विषय पर चर्चा को आगे बढ़ाना था।

संकट में सारस

सारस पक्षीसारस पक्षीसारस पक्षी के लिये दुनिया का एक मात्र स्थल होने के बावजूद इटावा को पूरी तरह से सरकारी तौर पर उपेक्षित रखा गया है,जब कि सर्वोच्च न्यायालय के सारस संरक्षण के आदेशों को बलाये ताक रख कर आजतक ना तो केन्द्र सरकार और ना ही उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई ठोस कार्य योजना अमल में नहीं लाई गई है.जब कि सारस पक्षी को उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य पक्षी का दर्जा देकर महज खाना पूरी कर रखी है.

कर्नाटक में भूजल गुणवत्ता का परिदृश्य - जिलेवार रिपोर्ट (2004)

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Karnataka Rural Water Supply and Sanitation Agency (KRWSSA)
ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता के मद्देनजर, विश्व बैंक की सहायता और कर्नाटक के ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता एजेंसी ने एक कार्यक्रम "जलनिर्मल योजना" चलाया। इस योजना के ही एक भाग के रूप में कर्नाटक राज्य-सरकार ने राज्य के भूजल गुणवत्ता पर भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के आधार पर एक नोलेज बेस विकसित करने का निर्णय लिया।

नदियाँ गुस्से में हैं

वेब/संगठन: 
janadesh in
Source: 
जीडी द्विवेदी
नदियों का कटाननदियों का कटानगोण्डा तथा बहराइच में सरयू तथा घाघरा नदियों के धारा बदलने से दर्जनों गावों के अस्तित्व पर संकट है। नदियों के धारा बदलने का काम प्राय: मानवीय हस्तक्षेप का ही परिणाम होता है। नदियों के रास्ते में रुकावट, उनके आगोर के जंगल खत्म होने, उनके ढांड़ को खनन से समाप्त करने आदि नदियों के गुस्सा के कारण होते हैं।

जलवायु परिवर्तन और वंचित समाज

Source: 
उत्तराखंड पत्रिका

धरती के गर्म होते मिजाज, इसकी वजह से हो रहे जलवायु परिवर्तन और अंतत: मानव के साथ-साथ तमाम जंतुओं और वनस्पतियों, वृक्ष प्रजातियों, फसलों इत्यादि पर हो रहे असर को कम करने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें इन तमाम विषयों के प्रति संवेदनशीलता की परम आवश्यकता है। आज पूरे विश्व की निगाह आगामी दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र के कोपेनहेगेन सम्मेलन पर टिकी है। इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से जुड़े उन तमाम विषयों पर चर्चा होनी है जिनका संबध संपूर्ण मानवता, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन से है। आज के हालात में जलवायु परिवर्तन गंभीर और संवेदनशील मामला बन गया है इसलिए जलवायु में आ रहे बदलाव को रोकने के लिए तरह-तरह के उपाय जारी हैं।

जल प्रदूषण के खिलाफ किसानों ने कमर कसी

Source: 
दैनिक हिन्दुस्तान
जल प्रदूषणजल प्रदूषणकुछ साल पहले मैंने राजस्थान के टेक्सटाइल नगर पाली के बारे में लिखा था, जिसकी मौसमी नदी बांदी का पानी औद्योगिक कचरे के कारण पूरी तरह विषैला हो गया है। प्रदूषण के कारण खेती बर्बाद हो गयी थी। किसानों ने हंगामा किया था। और पानी प्रदूषण के खिलाफ पाली के किसानों ने कमर कसी हुई है, वे सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ रहे हैं। तब मैंने कहा था कि असली मुद्दा प्रदूषण नहीं, बल्कि किसानों का गुस्सा है जो तरल कचरे के कारण उनकी खेती की जमीन बर्बाद हो जाने से उपजा है। इस कचरे के चलते उनके कुओं का पानी विषैला हो गया था। किसानों के संघर्ष के बाद पाली नगर मे

रिहंद बना भोपाल..

रिहंदरिहंदउत्तर प्रदेश का सोनभद्र जनपद! कभी देश का स्विट्जरलैंड कहा जाता था आज वहां एक और भोपाल जन्म ले चुका है, उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा पर स्थित सोनभद्र के कमारी डांड गांव में रिहंद का जहरीला पानी पीकर पिछले १० दिनों में २० जानें गई हैं, वहीं सैकडों लोगों की हालत बेहद गंभीर है, इन मौतों से घबराए हजारों आदिवासी दूसरे इलाकों में पलायन कर गए हैं।